योग वासिष्ठ

सात प्रकरण, 28,087 श्लोक, एक ही संवाद।

ग्रंथ पढ़ें

योग वासिष्ठ क्या है

योग वासिष्ठ संस्कृत का एक विशाल ग्रंथ है, और पूरा का पूरा एक ही बातचीत के रूप में लिखा गया है। युवा राम तीर्थयात्रा से लौटते हैं और उनका मन जीवन से पूरी तरह उचट जाता है — धन, राज्य, भोग, सब कुछ उन्हें खोखला लगने लगता है। पिता दशरथ की भरी सभा में उनके कुलगुरु वसिष्ठ उन्हें उत्तर देते हैं। यही उत्तर लगभग अट्ठाईस हज़ार श्लोकों तक चलता है।

परंपरा इस ग्रंथ को वाल्मीकि का बताती है, जिन्हें रामायण का रचयिता भी माना जाता है। यह कब लिखा गया, इस पर विद्वानों में गहरा मतभेद है और कोई एक तिथि तय नहीं है। इतना ज़रूर लगता है कि यह एक बार में नहीं, बल्कि लंबे समय में बढ़ता गया।

यह सिखाता कैसे है

वसिष्ठ तर्क कम करते हैं और कहानियाँ ज़्यादा सुनाते हैं। उन कहानियों के पात्र फिर अपनी कहानियाँ सुनाते हैं, और इस तरह ग्रंथ कई परतों में उतरता चला जाता है। कोई एक क्षण में पूरा जीवन बीतते देखता है। कोई स्त्री एक पत्थर के भीतर यात्रा करती है। कोई राजा किसी और का पूरा जीवन जीकर लौट आता है।

कुछ चित्र बार-बार लौटते हैं — अँधेरे में रस्सी को साँप समझ लेना, मृगतृष्णा, सपना, आकाश में दिखता हुआ नगर। इन सबका इशारा एक ही बात की ओर है, जो इस ग्रंथ की मूल बात है: जो जगत आप देख रहे हैं उसकी हकीकत सपने जैसी है, और जो मन उसे ठोस मान बैठता है, वही बंधन है।

सात प्रकरण

ग्रंथ सात प्रकरणों में बँटा है। यहाँ सातों पूरे हैं, और आप किसी से भी पढ़ना शुरू कर सकते हैं:

1Vairāgyaवैराग्यDispassion33 अध्याय · 1,145 श्लोक2Mumukṣuमुमुक्षुThe Seeker20 अध्याय · 805 श्लोक3Utpattiउत्पत्तिCreation122 अध्याय · 5,389 श्लोक4Sthitiस्थितिExistence62 अध्याय · 2,396 श्लोक5UpaśamaउपशमDissolution93 अध्याय · 4,241 श्लोक6Nirvāṇa Iनिर्वाणLiberation, part one128 अध्याय · 5,297 श्लोक7Nirvāṇa IIनिर्वाणLiberation, part two216 अध्याय · 8,814 श्लोक

इस संस्करण के बारे में

यहाँ मूल संस्कृत देवनागरी और IAST — दोनों लिपियों में है, और पूरा ग्रंथ किसी भी लिपि में खोजा जा सकता है। हिन्दी और अंग्रेज़ी अनुवाद संस्कृत से एक भाषा-मॉडल की मदद से तैयार किए गए हैं और किसी संस्कृत विद्वान ने इनकी जाँच नहीं की है। कोशिश यही रही है कि भाषा सरल और रोज़मर्रा की रहे — पढ़ते समय शब्दकोश खोलने की ज़रूरत न पड़े।

इन्हें प्रमाण नहीं, पढ़ाई में सहारा मानिए। जहाँ अर्थ महत्वपूर्ण लगे, वहाँ संस्कृत उसी पंक्ति में मौजूद है। पूरा ग्रंथ पढ़ना भारी लगे तो लघु योग वासिष्ठ नाम का पारंपरिक संक्षिप्त रूप भी प्रचलित है, जो शुरुआत के लिए आसान पड़ता है।

कहाँ से शुरू करें

पहला प्रकरण सबसे छोटा है और पूरी बातचीत की भूमिका बाँधता है — राम विस्तार से बताते हैं कि उन्हें क्या खटक रहा है। अगर आप सीधे उन कहानियों तक पहुँचना चाहते हैं जिनके लिए यह ग्रंथ जाना जाता है, तो तीसरे प्रकरण से शुरू कीजिए।

पढ़ना पूरी तरह मुफ़्त है। न कोई खाता, न कोई विज्ञापन।